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खाता एग्रीगेटर (एए) नेटवर्क को भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा वित्तीय आंकड़ों को साझा करने की प्रणाली के रूप में प्रारंभ किया गया था, जब उन्होंने 2 सितंबर, 2016 को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) - खाता एग्रीगेटर (रिज़र्व बैंक) निर्देश जारी किया था। भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 19 अगस्त, 2022 को एक परिपत्र प्रकाशित किया, जिसमें इसकी विनियमित संस्थाओं को एए ढांचे का हिस्सा बनने की अनुमति दी गई।

एए एक गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी (एनबीएफसी) है जो किसी व्यक्ति के निर्देश और सहमति के आधार पर एक वित्तीय संस्था से दूसरी वित्तीय संस्था को वित्तीय जानकारी उपलब्ध कराने की सेवा प्रदान करने का कार्य करती है। एए द्वारा व्यक्ति की स्पष्ट सहमति के बिना उसकी कोई वित्तीय जानकारी को पुन: प्राप्त, साझा या हस्तांतरित नहीं किया जाता है।

संस्थाएं, जो किसी वित्तीय क्षेत्र के विनियामक के पास पंजीकृत और विनियमित हों, वे एए ढांचे पर एफआईपी अर्थात् बैंकिंग कंपनी, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी, आस्ति प्रबंधन कंपनी, डिपॉजिटरी, डिपॉजिटरी सहभागी, बीमा कंपनी, बीमा रिपॉजिटरी, पेंशन निधि आदि और वित्तीय सूचना उपयोगकर्ता (एफआईयू) के रूप में खुद को नामांकित कर सकती हैं। वर्तमान में, आरबीआई ने छह कंपनियों को एए के रूप में पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान किया है।

खाता एग्रीगेटर की अद्यतन प्रगति

अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क निम्नलिखित कार्यकलापों के साथ बैंकिंग, प्रतिभूति, बीमा और पेंशन क्षेत्रों में बाजार का अधिग्रहण करते हुए बढ़ रहा है:

  • सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंक सहित 23 बैंकों ने एफआईपी और एफआईयू के रूप में एए में शामिल हो गए हैं।
  • 1.1 बिलियन से अधिक बैंक खाते के आंकड़ों को एए पर साझा किया जा सकता है।
  • 10 सेबी विनियमित, 7 बीमा विनियमित और 2 पीएफआरडीए विनियमित संस्थाएं एए पर सक्रिय हैं।
  • लगभग 1.4 मिलियन उपयोगकर्ताओं ने एए ढांचे से आंकड़ों को संबद्ध और साझा किया है।
  • 72 संस्थाएं एए के माध्यम से एफआईपी और एफआईयू के रूप में डेटा एक्सेस कर रही हैं।